
'क्योंकी हर एक फ्रैंड ज़रुरी होता है...' जी हां बिल्कुल सही है हम सभी की ज़िंदगी में हर एक दोस्त की अलग- अलग अहमियत होती है और हर एक हमारे लिए ज़रुरी होता है । हम जब इस दुनिया में आते है उस वक्त हमें पहले से ही लगभग हर रिश्ता बना बनाया मिलता है बस कुछ रिश्ते ही ऐसे होते हैं जो इंसान बाद में वक्त के अनुरुप चुनता है और उनमें से ही एक रिश्ता है दोस्ती का....ये दोस्ती स्कूल से शुरु होती है...जब बचपन में Class में Homework ना करने पर Teacher हमें Punish करती थी तो हमारे हाथों पर Scale के पड़ने वाले निशान का दर्द First Bench पर बैठने वाले हमारे दोस्तों के हाथों में होता था । शाम को साइकिल चलाते वक्त गिरने पर सभी दोस्त घर पर मैरी मम्मी से झूठ बोलते की आंटी बस थोड़ी सी चोट आई है और वो भी रुचि की गलती से नहीं बल्कि वो एक आदमी स्कूटर से आ रहा था उसे ही दिखाई नहीं दिया, ये झूठ इस लिए था की कहीं अगर मम्मी को ये पता चला की गलती मेरी है तो शादत डांट के साथ साथ कल से साइकिल राइड भी बंद हो जाएगी...क्योंकी दोस्ती ही एक ऐसा रिश्ता है जो बिना किसी कॉम्पटीशन के डर से चला जाता है ।Exam में कम Marks आने पर घर में सभी Friends ये बोलते थे की अंकल कितना भी पढ़लो पता नहीं क्यूं ये टीचर्स ऑउट ऑफ सिलेबस QUESTION PAPER बनाते हैं.. इतना ही नहीं ये दोस्ती सिर्फ स्कूल की मस्ती तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि कॉलेज में भी इसके कई प्यारे और रंगीन रंग दिखते हैं । बेशक मेरे और मेरी फ्रैंड्स के FIRST CUT OF LIST वाले MARKS आए हों लेकिन हमेने एडमिश्न उसी डफर कॉलेज में लिया जिसमें हमारे दोस्त का एडमिशन हुआ है और हम ने अपने अपने घर पर कहा की आपको नहीं पता डैडी इस कॉलेज का नया (फलां) Course सबसे अच्छा है... ग्रुप स्टडी से लेकर नाइट आउट और Pyjama Party से लेकर कॉलेज की खाली क्लास रुम में जाकर दरवाजा बंदकर पहली बार सिगरेट को डर डर कर हाथ लगाना...सबकुछ दोस्तों के साथ कितना याद आता है... क्साल मेट की Birthday Party में जाकर सभी का एक साथ हल्ला गुल्ला करना और तो और नाइट स्टे करने के नाम पर पहली बार ऑरेंज जूस में थोड़ी वोटका मिलाकर पीना और अपने अपने Boy friend की बाते हों और New Crush के बारे में बताना हो...मानो अब सपना सा लगता है...
वैसे दोस्तों के हसीन किस्सों की फेहरिस्त सिर्फ इतनी ही नहीं है एक किस्सा इतना
दिलचस्प है की आपको बताते वक्त भी... मुझे हंसी आ रही है, दरसल...
एक दिन मैं घर देर से पहुंची तो मम्मी ने पहुंचा - ‘’ कहां थी
मैंने कहा – ‘’ फ्रैंड के घर ’’ ।
मम्मी ने मेरे ही सामने मेरे 10 दोस्तों को फोन कर दिया, 4 ने कहा – ‘’ हां आंटी यहीं पर थी ’’ , 2 ने कहा – ‘’अभी just निकली है
3 ने कहा – ‘’ यहीं है आंटी पढ़ रही है फोन दूं क्या ??? ‘’ , और तो और
एक दोस्त ने तो हद ही कर दी बोली – ‘’ हां मम्मी बोलिए क्या हुआ है,
बस घर पहुंचने वाली हूं ‘’
बेशक ये दोस्ती की सबसे ख़तरनाक मिसाल थी लेकिन यकीनन ये सब कुछ सिर्फ और सिर्फ दोस्तों और दोस्ती के बीच में ही हो सकता है , कहीं और नहीं । जब भी Office में बॉस से कुछ खिट-पिट हो तो दोस्त ही ऐसे होते हैं जो कहते हैं की छोड़ ना यार टेंशन लेने का नहीं देने का...चल कैंटीन में चलकर चाय पीते हैं और अगर जाने के बाद Canteen बंद हो तो सड़क की चाय से लेकर CCD की कैपिचिनो सबकुछ छान लेना उन लम्हों को चंद अलफाज़ो में फयान कर पाना मेरे लिए मुमकिन नहीं है । जब मंज़ील पाना मुश्किल लगे तो दोस्तों के साथ छत पर जाकर बारिश में भीग कर मस्ती करने में ऐसा ऐहसास होता है की किस चीज़ के लिए हम भाग रहे हैं, कहीं पर कुछ नहीं है अगर कुछ है तो बस दोस्तों के साथ बिताए जाने वाले यही लम्हें जिन्हें हम आज की की Date में काम के चक्कर भूल गए हैं । वैसे हर एक लम्हे की अलग जगह होती है और अहमियत भी....अगर आज ये टेंशन और काम में बिज़ी होने की वजह नहीं होती तो शायद दोस्तों और उनके साथ बिताए वो हसीन पलों की अहमियत भी पता नहीं चलती क्यूंकी इंसान के पास जो भी चीज़ होती है उसकी नज़र में उसकी अहमियत कम ही होती है ।
आज भी जब हम सभी दोस्त मिलते हैं तो हर रोज़ की तरह ये नहीं पूछते की Hello, Hi , How are you??? बल्कि बोलते हैं ओए कैसा है साले / कैसी है, और बता कुछ नया रायता ??? क्यूंकी यही एक मात्र ऐसा रिश्ता है जो ना किसी दिखावे पर टिकता है और ना ही मतलब पर ... तभी तो टेलीकॉम कम्पनी ने भी इसी रिश्ते का इमोश्ल सहारा लेकर हमारी और आपकी जेल ढ़ीली करने का प्रोजेक्ट बनाया था जिसमें वो कामियब भी रहे.... भई इसी लिए को कहते हैं की - चाय के लिए जैसे टोस्ट होता है,
वैसे हर एक फ्रैंड ज़रुरी होता है ।
Ruchi Rai






